मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दो अहम फैसलों में कहा है कि बालिग युवक-युवती अपनी इच्छा से जीवनसाथी चुनने और जीवन जीने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

HighLights
- लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब नागरिक संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता का निर्भय होकर उपयोग कर सकें
- ये फैसले व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और न्यायिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए अहम माने जा रहे हैं
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसलों से फिर यह स्पष्ट किया-वह संविधान का सजग प्रहरी है
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के दो हालिया निर्णय केवल प्रदेश तक सीमित न्यायिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि उन्होंने पूरे देश के सामने संविधान की मूल भावना को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया है। इन फैसलों ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायपालिका की निर्भीक स्वायत्तता में निहित है।
एक मामले में हाई कोर्ट ने दो टूक कहा कि बालिग युवक-युवती अपनी इच्छा से जीवन जीने और जीवनसाथी चुनने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं। अदालतें माता-पिता के अहंकार या सामाजिक दबाव की तुष्टि के लिए सुपर गार्जियन की भूमिका नहीं निभा सकतीं। न्यायालय का यह संदेश केवल एक युगल तक सीमित नहीं, बल्कि उन सभी बालिग नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की पुनर्पुष्टि है, जिन्हें अपनी पसंद के कारण सामाजिक या पारिवारिक दबाव का सामना करना पड़ता है।
न्यायपालिका का दायित्व संविधान की आत्मा की रक्षा करना
दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण संकेत दिया कि लोकतंत्र तभी सशक्त रह सकता है, जब प्रत्येक नागरिक को संविधान प्रदत्त स्वतंत्रता का निर्भय होकर उपयोग करने का अवसर मिले। न्यायपालिका का दायित्व केवल विवादों का निपटारा करना नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा की रक्षा करना भी है।
इन दोनों निर्णयों का साझा आधार भारतीय संविधान में निहित व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और विधि के शासन का सिद्धांत है। पहला फैसला व्यक्ति को अनावश्यक सामाजिक और पारिवारिक हस्तक्षेप से संरक्षण देता है, जबकि दूसरा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और न्यायिक स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करता है। यही वह संवैधानिक संतुलन है, जो भारत के लोकतंत्र को मजबूत आधार प्रदान करता है।
देश की अदालतें भी यही इस दिशा में रही हैं सक्रिय
देश की विभिन्न संवैधानिक अदालतें समय-समय पर यह दोहराती रही हैं कि बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने और अपनी इच्छा के अनुरूप जीवन जीने का मौलिक अधिकार है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के ताजा निर्णय इसी स्थापित संवैधानिक दर्शन को और अधिक स्पष्टता, दृढ़ता तथा समकालीन संदर्भ प्रदान करते हैं।
समृद्ध न्यायिक परंपरा की स्वाभाविक निरंतरता
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने समय-समय पर नर्मदा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, महिलाओं की गरिमा, प्रशासनिक जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े अनेक मामलों में महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किए हैं। न्यायालय ने अनेक अवसरों पर यह स्पष्ट किया है कि संविधान केवल शासन का दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और गरिमा का सुरक्षा कवच है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर आए हालिया फैसले इसी समृद्ध न्यायिक परंपरा की स्वाभाविक और सशक्त निरंतरता हैं।
