दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा में हुई 36 लोगों की मौत से भी नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। वार्ड 16 के महावीर नगर में रहवासी पिछले कई दिनों से सीवरेज …और पढ़ें

HighLights
- इंदौर के भागीरथपुरा की 36 मौतों से भी नहीं लिया सबक
- शिकायत के बाद भी रहवासी दूषित पानी पीने को मजबूर
- कई दिनों से नलों में आ रहा था गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दूषित पानी पीने से भागीरथपुरा में हुई 36 लोगों की मौत से भी नगर निगम ने कोई सबक नहीं लिया। वार्ड 16 के महावीर नगर में रहवासी पिछले कई दिनों से सीवरेज मिला पानी पी रहे थे। उन्होंने बोरिंग से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत भी की, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी, वे इसे सामान्य शिकायत मानकर बहाने बनाते रहे। तीन दिन पहले क्षेत्र में अचानक उल्टी-दस्त के मरीज मिलने लगे तो हड़कंप मचा। नींद से जागे निगम अधिकारी मंगलवार दोपहर मौके पर पहुंचे।
जांच हुई तो पता चला कि रहवासी जिस बोरिंग का पानी पी रहे हैं वह चारों तरफ से सीवरेज चैंबरों से घिरा हुआ है। इन चैंबरों से रिस कर सीवरेज बोरिंग के पानी में मिल रहा था। निगम ने इस बोरिंग को बंद कर दिया है। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने हाथों हाथ महावीर नगर में एक नया बोरिंग स्वीकृत कर दिया। क्षेत्र में पानी सप्लाई के लिए दो अतिरिक्त टैंकर भी लगाए गए हैं। सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी क्षेत्र में पहुंची और सर्वे शुरू कर दिया।
नर्मदा लाइन नहीं, बोरिंग ही एकमात्र सहारा
छोटा बागड़दा के महावीर नगर में नर्मदा लाइन है ही नहीं। यहां पानी सप्लाई के लिए एकमात्र बोरिंग है। पिछले कई दिनों से रहवासी शिकायत कर रहे थे कि इस बोरिंग से गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। इसकी वजह से पेट दर्द, उल्टी, दस्त की समस्या हो रही है, लेकिन उनकी शिकायत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र के बोरिंग से दूषित पानी आने और उल्टी दस्त के मरीजों के मिलने की खबर मंगलवार सुबह निगम पहुंची जिसके बाद निगम के अधिकारी दौड़े-दौड़े महावीर नगर पहुंचे।
मात्र पांच फीट की दूरी पर मिले सीवरेज चैंबर
जिस बोरिंग से दूषित पानी आ रहा था उसके चारों ओर पांच-पांच फीट दूर सीवरेज चैंबर हैं। ये चैंबर वर्षों पुराने हैं और इनमें प्लास्टर भी नहीं है। इस वजह से सीवरेज इन चैंबरों से रिसकर बोरिंग तक पहुंच रहा था। निगम ने चैंबरों की सफाई के साथ ही बोरिंग को बंद कर दिया।
पार्षद ने दो दिन पहले ही सप्लाई बंद की
रहवासियों ने बोरिंग से दूषित पानी आने की शिकायत स्थानीय पार्षद सोनाली धारकर से भी की थी। बोरिंग से गंदा और बदबूदार पानी आने की पुष्टि होने के बाद पार्षद ने स्वयं इस बोरिंग को बंद करवा दिया था। रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में नर्मदा लाइन नहीं होने के बावजूद टैंकरों से पानी सप्लाई में कोताही बरती जाती है। रहवासियों को पानी के लिए जगह-जगह भटकना पड़ता है।
अधिकारियों और जनप्रतनिधियों के बयान
बोरिंग से दूषित पानी आ रहा था। इसे बंद कर दिया गया है। रहवासियों को टैंकरों के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही ड्रेनेज लाइनों की सफाई भी करवा दी गई।- विनोद अग्रवाल, जोनल अधिकारी (जोन एक)
दूषित और बदबूदार पानी आने की शिकायत के बाद बोरिंग पर ताला लगा दिया था। बोरिंग में सीवरेज मिल रहा था। हमने पूरे क्षेत्र में टैंकरों से पानी सप्लाई की व्यवस्था की है। रहवासी तीन-चार दिन से बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे थे।- सोनाली मुकेश धारकर, पार्षद (वार्ड 16)
निगम की अपील- पानी उबालकर ही पीएं
मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने रहवासियों से अपील की है कि वे पानी उबालकर ही पीएं। निगम ने पानी के नमूने भी परीक्षण के लिए भेज दिए हैं।
यह भी पढ़ें- इंदौर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई… 10 हजार की रिश्वत लेते महिला पटवारी लोकायुक्त के हत्थे चढ़ी
भागीरथपुरा की लापरवाही की यादें हुईं ताजा
लगभग छह माह पहले भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से 36 लोगों की जान गई थी। जांच में यह बात सामने आई थी कि पानी सप्लाई बनाए रखने के लिए भागीरथपुरा में नर्मदा लाइन में ही बोरिंग की लाइन जोड़ दी गई थी। बोरिंगों का दूषित पानी इस लाइन से होता हुआ लोगों के घरों तक पहुंच गया और लोग इसे नर्मदा जल समझकर पीते रहे।
