जनहित याचिका में कहा गया है कि बरगी डेम आदि पर्यटक स्थलों पर अनिवार्य रूप से विंड मेजरमेंट डिवाइस या मीटर लगाया जाना चाहिए। लिहाजा, यह जांच का विषय है …और पढ़ें

HighLights
- संजय द्विवेदी के न्यायिक जांच आयोग के समक्ष जनहित याचिका में उठाया गया सवाल।
- मौसम विभाग ने जानकारी दी या नहीं, बरगी हूटर बजा या नहीं, इनकी जांच पर बल।
- मौसम विभाग द्वारा रेलवे, एविएशन आदि को भी इस तरह की जानकारी दी जाती है।
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया जबलपुर। दिल दहला देने वाले बरगी डेम क्रूज हादसे को लेकर हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी के एकल न्यायिक जांच आयोग के समक्ष सोमवार को एक जनहित याचिका दायर की गई। इसके जरिए सवाल किया गया है कि क्रूज को तोड़ा क्यों गया, क्या किसी जिम्मेदार एक्सपर्ट एडवाइस के जरिए इसकी परमीशन दी गई थी।
इसी तरह मौसम विभाग एकमात्र ऐसा जिम्मेदार विभाग हैं, जो ज्योतिषशास्त्र की भांति पहले ही जान जाता है कि भविष्य में मौसम का रुख क्या होने वाला है। मौसम विभाग द्वारा रेलवे, एविएशन आदि को भी इस तरह की जानकारी दी जाती है।
जन सामान्य तक भी इस तरह की जानकारी सूचना माध्यमों के जरिए पहुंचाई जाती है। मौसम विभाग ने यह जानकारी एमपी टूरिज्म को दी कि नहीं दी, यह जांच का विषय है। बरगी डेम के द्वारा हूटर बजाकर यह जानकारी दी या नहीं दी गई, यह जांच का विषय है।
यह जनहित याचिका जबलपुर निवासी अखिलेश त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है, जिनकी ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे पक्ष रखेंगे। उन्हाेंने बताया कि बरगी डेम क्रूज हादसे की जांच को सही दिशा में बढ़ाए जाने की मंशा से जनहित याचिका प्रस्तुत करने का कदम उठाया गया है।
यात्रियों व क्रूज आदि का बीमा था या नहीं
बरगी डेम पहुंचने वाले पर्यटकों का बीमा था या नहीं। क्रूज का बीमा था या नहीं। क्रूज के यात्रियों का बीमा किए जाने की व्यवस्था थी या नहीं। जिन वाहनों से आवागामन होता है, उनका बीमा था या नहीं। ये तमाम बिंदु भी जनहित याचिका में रेखांकित किए गए हैं। इनकी जांच पर बल दिया गया है। भेड़ाघाट व गौरीघाट के यात्रियों काे भी इसमें शामिल किया गया है।
विंड मेजरमेंट डिवाइस क्यों नहीं लगी
जनहित याचिका में कहा गया है कि बरगी डेम आदि पर्यटक स्थलों पर अनिवार्य रूप से विंड मेजरमेंट डिवाइस या मीटर लगाया जाना चाहिए। लिहाजा, यह जांच का विषय है कि ऐसा किया गया था या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि विंड मीटर से पर्यटकों को आसानी से दिख जाता है कि हवा की गति सामान्य है या खतरनाक। इससे अपेक्षित सावधानी सिविक सेंस के तहत बरती जा सकती है। नजीजतन हादसों से भी बचा जा सकता है।
जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए
जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार पीआरओ ने एक सूची जारी की थी, जिसके अनुसार एसडीआरएफ या एनडीआरएफ के कोई भी कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं थे। इसके स्थान पर बरगी के समीप चल रहे एक प्रोजेक्ट के कर्मचारियों ने तत्परता दुर्घटनास्थल पहुंचकर राहत व बचाव कार्य किया था। लिहाजा, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह साफ होना चाहिए कि लापरवाही किसकी थी, और दोषी कौन है।
इस जनहित याचिका सोमवार को एक घंटे तक सुनवाई की गई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता व उनके वकील द्वारा प्रस्तुत जानकारी व तर्काें को सुना गया। उनकी ओर से निवेदन किया गया कि सभी रेखांकित बिंदुओं व साक्ष्यों को जांच में शामिल किया जाए। साथ ही सभी संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के कथन व परीक्षण नए सिरे से दर्ज किए जाएं। एकल जांच आयोग की ओर से इस मांग पर गंभीरता से विचार का भरोसा दिलाया गया है।
-न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी, चेयरमैन, एकल न्यायिक जांच आयोग, बरगी डेम क्रूज हादसा
