उन्होंने आरोप लगाया कि भोजशाला में अब भी पुराने प्रारूप के टिकट दिए जा रहे हैं, जिन पर ‘भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद’ अंकित है। …और पढ़ें

HighLights
- हिंदू फ्रंट फार जस्टिस ने एएसआई पर आपत्ति
- बंद गणपति कक्ष और सर्वे में मिली मूर्तियां
- श्रद्धालुओं के लिए खोलने की भी उठी मांग
नईदुनिया प्रतिनिधि, धार। भोजशाला में प्रवेश के लिए एएसआई द्वारा लिए जा रहे एक रुपये टिकट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू फ्रंट फार जस्टिस के जिलाध्यक्ष और भोजशाला मामले के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने टिकट व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए इसे तत्काल बंद करने की मांग की है।
गोयल ने कहा कि इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ ने अपने फैसले में भोजशाला को मंदिर माना है। ऐसे में मंदिर में प्रवेश के लिए टिकट लेने का औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि सात अप्रैल 2003 के आदेश के तहत यह टिकट व्यवस्था लागू की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट द्वारा उक्त आदेश निरस्त किए जाने के बाद भी व्यवस्था जारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भोजशाला में अब भी पुराने प्रारूप के टिकट दिए जा रहे हैं, जिन पर ‘भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद’ अंकित है। हालांकि ‘कमाल मौला मस्जिद’ शब्द को स्केच पेन से काटा जा रहा है। गोयल ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि फैसले के बाद व्यवस्थाओं में तत्काल बदलाव होना चाहिए।
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गणपति मंदिर को खोलने की भी मांग
- गोयल ने भोजशाला परिसर में स्थित बंद कमरे को भी खोलने की मांग की, जिसे गणपति मंदिर बताया जाता है। उनका कहना है कि एएसआई सर्वे में वहां द्वारपाल मूर्ति मिलने की पुष्टि हुई है।
- जब न्यायालय मंदिर होने का निर्णय दे चुका है, तो उस हिस्से को बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है।
- उन्होंने सर्वे में मिले पुरातात्विक अवशेषों और 94 मूर्तियों को व्यवस्थित रूप से सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखने की मांग भी उठाई।
- उनका कहना है कि वर्तमान में कई अवशेष लोहे के स्टैंड पर रखे हैं, लेकिन श्रद्धालुओं की वहां तक पहुंच नहीं है। इसलिए दर्शन के लिए मार्ग खोला जाना चाहिए।
- गोयल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासन और एएसआइ को सभी व्यवस्थाओं को स्पष्ट करते हुए उन्हें तत्काल लागू करना चाहिए।
