दवाओं के सबसे बड़े थोक और फुटकर केंद्र हुजरात कोतवाली दवा बाजार पर सुबह से ही सन्नाटा देखा गया। …और पढ़ें

HighLights
- शटर रहे बंद, हुजरात दवा बाजार में सन्नाटा
- सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा दबाव, मरीजों की बढ़ी आफत
- मानवीय आधार पर इमरजेंसी और जीवनरक्षक दवाओं को मिली छूट
नई दुनिया, प्रतिनिधि, ग्वालियर। ऑनलाइन दवा कंपनियों (ई-फार्मेसी) की नीतियों और बिना पर्चे के धड़ल्ले से हो रही दवाओं की होम डिलीवरी के विरोध में बुधवार को ग्वालियर जिले के दवा बाजार पूरी तरह ठप रहे। ग्वालियर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के छोटे-बड़े रिटेल और थोक मेडिकल स्टोरों के शटर सुबह से ही नहीं खुले। इसके चलते मरीजों और उनके स्वजन को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
दवाओं के सबसे बड़े थोक और फुटकर केंद्र हुजरात कोतवाली दवा बाजार पर सुबह से ही सन्नाटा देखा गया। रोजाना जहां सुबह 9 बजे से ही दवाओं की लोडिंग-अनलोडिंग और खरीदारों की भारी चहल-पहल शुरू हो जाती थी, वहां आज सिर्फ बंद दुकानों के बंद शटर नजर आए। शहर के उपनगरों जैसे लश्कर, मुरार, थाटीपुर और हजीरा के रिहायशी इलाकों की दुकानें भी पूरी तरह बंद रहीं।
जेएएच और मुरार जिला अस्पताल पर बढ़ा भारी दबाव
निजी मेडिकल स्टोर बंद होने का सीधा असर सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों और पड़ोसी जिलों (भिंड, मुरैना, दतिया) से ग्वालियर रैफर होकर आए मरीजों की निर्भरता पूरी तरह अस्पताल के अंदर मिलने वाली मुफ्त दवाओं पर आ गई।
मरीजों की समस्या: कई गंभीर मरीजों के स्वजन ने बताया कि डाक्टरों द्वारा लिखी गईं कुछ विशिष्ट एंटीबायोटिक्स और क्रिटिकल केयर की दवाएं सरकारी स्टाक में उपलब्ध नहीं थीं, जिसके कारण उन्हें शहर के कोने-कोने में भटकना पड़ा।
इमरजेंसी के लिए कुछ जगह मिली राहत: मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए एसोसिएशन ने मानवीय आधार पर जेएएच और कुछ प्रमुख निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोरों को केवल इमरजेंसी और जीवनरक्षक दवाएं (जैसे इंसुलिन, कार्डियक ड्रग्स) देने की छूट दी थी।
