एम्स रायपुर समेत 18 केंद्रों ने भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के आनुवंशिक जोखिम पर पहली GWAS की। 400 प्रतिभागियों के अध्ययन में आनुवंशिक जोखिम के…और पढ़ें

HighLights
- एम्स रायपुर समेत देशभर के 18 केंद्र अध्ययन में शामिल।
- एम्स रायपुर में चार वर्षों में 400 प्रतिभागी शामिल हुए।
- अध्ययन में एंडोमेट्रियोसिस पीड़ित 200 महिलाएं शामिल थीं।
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भारतीय महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के आनुवंशिक जोखिम को समझने के लिए पहली जीनोम-वाइड एसोसिएशन स्टडी (जीडब्ल्यूएएस) की गई है। आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च आन विमेंस हेल्थ (आईसीएमआर-एनआईआरडब्ल्यूओएच), मुंबई के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में हुए इस बहुकेंद्रीय अध्ययन में देशभर के 18 केंद्र शामिल हुए। एम्स रायपुर भी इसका सहभागी केंद्र रहा। अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स, स्प्रिंगर नेचर की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
एंडोमेट्रियोसिस प्रजनन आयु की करीब 10 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है। इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसी ऊतक गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती है। इससे मासिक धर्म में तेज दर्द, लंबे समय तक पेल्विक दर्द, संभोग के दौरान दर्द, थकान और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भारत में बीमारी के निदान में देरी भी एक बड़ी चुनौती है।
400 प्रतिभागी हुए शामिल
अध्ययन के दौरान एम्स रायपुर में चार साल में 400 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। इनमें एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित 200 महिलाएं और 200 नियंत्रण प्रतिभागी थे। अध्ययन में देश के अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं भी शामिल थीं।
महिलाओं में मिले एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े आनुवंशिक जोखिम के संकेत
- अध्ययन का नेतृत्व आईसीएमआर-एनआईआरडब्ल्यूओएच के क्लीनिकल रिसर्च लैबोरेटरी के प्रमुख और साइंटिस्ट ई डा. राहुल के. गाजभिये ने किया। आस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी आफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर ग्रांट डब्ल्यू. मोंटगोमरी, प्रोफेसर गीता डी. मिश्रा और डॉ. सैली मोर्टलाक भी अध्ययन से जुड़े रहे।
आनुवंशिक पहलुओं को समझने में मिलेगी मदद
एम्स रायपुर के प्रोफेसर और अध्ययन के सह-लेखक डॉ. निलयकुमार बागड़े ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को शामिल करने से भारतीय आबादी में एंडोमेट्रियोसिस के आनुवंशिक पहलुओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी। एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने अध्ययन में शामिल टीम को बधाई दी।
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