नईदुनिया प्रतिनिधि, बालाघाट। जिले के बैहर और परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के सुदूर आदिवासी बैगा अंचलों में बीमारी से बच्चों की लगातार हो रही मौतों का मामला अब स्थानीय मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय त्रासदी का रूप ले चुका है। इस त्रासदी को लेकर आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है।
राष्ट्रीय धरना प्रदर्शन में पहुंचे 18 राज्यों के आदिवासी
3 सितंबर को बालाघाट बंद के बाद शनिवार को जिला मुख्यालय में राष्ट्रीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित देश के 18 राज्यों के आदिवासी नेतृत्वकर्ता शामिल हुए। धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने राज्य ही नहीं, केंद्र सरकार पर भी जमकर निशाना साधा।
जिम्मेदार भूल गए नैतिकता, होती तो दे देते इस्तीफा
आंबेडकर चौक पर आयोजित राष्ट्रीय धरना प्रदर्शन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह मरकाम और राष्ट्रीय सचिव श्याम मरकाम विशेष रूप से शामिल हुए। मंच से उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अपनी नैतिकता को भूल चुके हैं।
नाकामयाबी मानकर स्वयं ही पद मुक्त हो जाते
यदि उनमें नैतिकता होती तो वे इस घटनाक्रम को अपनी विफलता और नाकामयाबी मानकर स्वयं ही पद से इस्तीफा दे देते। उन्होंने कहा कि महीनों पहले ही प्रशासन को पता था कि इन क्षेत्रों में टीकाकरण नहीं होने से मीजल्स फैला हुआ है और कुपोषण तथा मलेरिया ने बच्चों को जकड़ रखा है, फिर भी समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सर्वोच्च पद पर आदिवासी नेतृत्व, फिर भी समाज हताश
धरना प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की प्रतिनिधि राष्ट्रपति के रूप में विराजमान हैं, इसके बावजूद बैगा मौत त्रासदी को न तो संज्ञान में लिया गया और न ही उनकी ओर से कोई वक्तव्य आया है। इससे पूरे आदिवासी समाज में घोर निराशा है।
संरक्षक राष्ट्रपति और प्रदेशों में राज्यपाल होते हैं
बैगा समुदाय को केंद्र सरकार ने विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) और राष्ट्रीय मानव का दर्जा दिया है, जिसके संरक्षक राष्ट्रपति और प्रदेशों में राज्यपाल होते हैं। इसके बावजूद उनके कल्याण के लिए आरक्षित फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है और बंदरबांट का आरोप लगाया जा रहा है।
राष्ट्रपति, पीएम और गृहमंत्री से सीएम के इस्तीफे की मांग करेंगे
मंच से आदिवासी नेताओं ने कहा कि किसी भी गांव, शहर, जिला या राज्य में किसी भी प्रकार की विफलता उसके मुखिया की विफलता होती है। बैहर और परसवाड़ा में 29 से अधिक बच्चों की मौत मुखिया की विफलता का परिणाम है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया है।
देशभर के आदिवासी नेताओं ने चिंता जताई
छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के आदिवासी नेताओं ने निर्णय लिया है कि वे तत्काल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करेंगे।बताया गया कि इस त्रासदी को लेकर दिल्ली में राष्ट्रीय आदिवासी समन्वय समिति की बैठक भी हुई है, जिसमें देशभर के आदिवासी नेताओं ने चिंता जताई है।
पोषण आहार की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
नेताओं ने मांग की है कि इस घटना को राष्ट्रीय बैगा त्रासदी घोषित किया जाए, मृतक बच्चों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं, टीकाकरण तथा पोषण आहार की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
आंबेडकर चौक से आमसभा और रैली निकाली गई
शनिवार को धरना प्रदर्शन के बाद आंबेडकर चौक से आमसभा और रैली निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी, बैगा समाज के लोग, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर भुवन सिंह कुर्राम, विनोद नागवंशी सहित अन्य मौजूद रहे।
यह भी पढ़ें- जबलपुर में गणेश प्रतिमा बना रहे मूर्तिकार पर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियां, बाइक सवार युवकों ने वारदात को दिया अंजाम
