नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। लखनऊ में दर्ज एक मामले की जांच के तार उज्जैन की एक फार्मा फर्म तक पहुंची है। उत्तर प्रदेश एफएसडीए और पुलिस की टीम ने स्थानीय औषधि प्रशासन, आयुष विभाग और पुलिस के साथ न्यू इंडस्ट्रियल एरिया, आगर रोड स्थित मेसर्स रुद्राया फार्मा पर छापा मारा।
जांच में सामने आया कि फर्म के पास आयुर्वेदिक दवा निर्माण का लाइसेंस था, लेकिन इसी की आड़ में एलोपैथिक दवा लिवेरा-500 तैयार किए जाने का आरोप है। टीम को फैक्ट्री की छत से 5250 बिना लेबल वाली संदिग्ध ग्लास वायल भी मिली हैं। इन्हें सात कार्टन में सील कर नमूने जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
कार्रवाई के दौरान फर्म संचालक प्रेम मलिक और उसका पुत्र राहुल मलिक उर्फ रितिक मौके पर मिले। पूछताछ में पता चला है कि वह एजाज अहमद के साथ करीब आठ से दस साल से जुड़े थे। जांच के अनुसार एजाज के कहने पर लिवेरा-500 में इस्तेमाल होने वाला लेवेटिरासेटम आईपी मुंबई की फर्मों से मंगाया जाता था। इसी कच्चे माल से उज्जैन में दवा तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
4.80 लाख गोलियां तैयार करने की जानकारी
जांच में करीब 4.80 लाख गोलियां, यानी लगभग 32 हजार स्ट्रिप, उज्जैन में तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन दवाओं को हरिद्वार भेजे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। लिवेरा-500 में लेवेटिरासेटम होता है, जिसका उपयोग मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
एफआईआर की जानकारी मिलते ही नष्ट किया सामान
लखनऊ में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद रुद्राया फार्मा में तैयार दवा, पैकिंग मैटेरियल और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाली डाई-पंच को नष्ट किए जाने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा पैकिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली एलू-एलू मशीन को देवास में छिपाए जाने की जानकारी भी टीम को मिली है। अब जांच एजेंसियां मशीन और अन्य सामग्री के संबंध में भी जानकारी जुटा रही हैं।
देवास की फर्म से भी जुड़ा कनेक्शन
जांच में रुद्राया फार्मा और देवास की सॉफ्ट मेडीकेप के बीच भी कनेक्शन सामने आया है। बताया गया है कि प्रेम मलिक देवास की साफ्ट मेडीकेप में मैनेजर के रूप में काम करता था, जबकि उसका पुत्र राहुल मलिक उर्फ रितिक उज्जैन में मेसर्स रुद्राया फार्मा का संचालन करता है। जांच एजेंसियां दोनों फर्मों के बीच कारोबारी संबंधों और दवा निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
सात कार्टन में सील की गईं वायल
कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री की छत से मिली 5250 बिना लेबल वाली ग्लास वायल को टीम ने सात कार्टन में सील किया है। वायल में क्या सामग्री थी और उनका इस्तेमाल किस दवा के निर्माण में किया जाना था, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी। नमूने राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज प्रकरण की जांच के आधार पर हुई इस कार्रवाई के बाद उज्जैन में कथित अवैध एलोपैथिक दवा निर्माण और उसकी सप्लाई के नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि तैयार दवा कहां-कहां सप्लाई की गई और इस पूरे नेटवर्क में और कौन लोग जुड़े हैं।
