निजी नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े के बाद अब सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की हालत भी सामने आ गई है। प्रदेश के कई शासकीय कॉलेज बिना प्राचार्य, बिना उप प्राचा…और पढ़ें

HighLights
- भोपाल BMHRC, अमरकंटक और दतिया नर्सिंग कॉलेज की मान्यता रद
- 15 सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसर और ट्यूटर के पद खाली
- NSUI का आरोप: बिना फैकल्टी कैसे पूरा होगा छात्रों का प्रशिक्षण
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। निजी नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े के बाद अब सरकारी नर्सिंग कॉलेजों की हालत भी सामने आ गई है। प्रदेश के कई शासकीय कॉलेज बिना प्राचार्य, बिना उप प्राचार्य और बिना पूरी फैकल्टी के ही चल रहे हैं। इसे लेकर एनएसयूआई ने रविवार को प्रेसवार्ता कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
संगठन के सदस्यों ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए 22 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों ने मान्यता के लिए आवेदन किया था। इनमें से भोपाल के बीएमएचआरसी, अमरकंटक यूनिवर्सिटी अनूपपुर और दतिया के शासकीय नर्सिंग कॉलेज को मान्यता नहीं मिली। संगठन का दावा है कि छह कॉलेजों में प्राचार्य नहीं हैं, 10 में उप प्राचार्य नहीं हैं और 15 कॉलेजों में मान्यता नियम 2018 के अनुसार प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और ट्यूटर पूरे नहीं हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी, एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार, अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और अधिवक्ता अंशुल तिवारी मौजूद रहे। एनएसयूआई ने मान्यता के लिए फर्जी दस्तावेज लगाने का आरोप भी लगाया। बताया कि भोपाल के बीएमएचआरसी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर को वाइस प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को एसोसिएट प्रोफेसर दिखा दिया गया। अमरकंटक में तो कॉलेज खुला ही नहीं है, फिर भी प्राचार्य ने एक साल छह महीने और उप प्राचार्य ने तीन साल का अनुभव दिखा दिया।
सीबीआई जांच के बाद भी सुधार नहीं: हाई कोर्ट में याचिका दायर
एनएसयूआई का कहना है कि नर्सिंग कॉलेजों की दो बार सीबीआई जांच में भी सरकारी कॉलेजों में कमियां मिली थीं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सुधार नहीं किया। बिना फैकल्टी के छात्रों का प्रशिक्षण कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है। इसी को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। विवेक त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षा माफिया के इशारे पर सरकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज बंद या निजीकरण किए जा रहे हैं। प्रदेश में 29 सरकारी विश्वविद्यालय हैं तो 54 प्राइवेट हो गए हैं, कई फर्जी तरीके से चल रहे हैं।
