मध्य प्रदेश में 42 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीधी भर्ती कोटे से नियुक्त डिप्टी कलेक्टरों की ओर से दायर…और पढ़ें

HighLights
- सुप्रीम कोर्ट से MP सरकार को झटका नहीं
- हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इनकार
- 42 पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द होगी पूरी
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश में 42 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अरविंद कुमार व न्यायमूर्ति विपुल बी पंचोली की युगलपीठ ने सीधी भर्ती कोटे से नियुक्त डिप्टी कलेक्टरों की ओर से दायर एसएलपी निरस्त कर दी। इसके साथ ही हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया, जिसमें 42 पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए थे।
हाई कोर्ट के आदेश और पदोन्नति में देरी
हाई कोर्ट ने एक जुलाई 2026 को राज्य शासन को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) गठित कर 45 दिन के भीतर 42 पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। साथ ही पदोन्नत अधिकारियों को एक जनवरी 2016 से वरिष्ठता और अन्य लाभ देने का आदेश दिया था। शासन की प्रक्रिया में देरी के कारण पात्र अधिकारियों की पदोन्नति करीब दस वर्ष तक अटकी रही थी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और वरिष्ठता का विवाद
अधिकारियों ने तर्क दिया था कि उन्हें सुने बिना 2016 से पूर्व प्रभावी वरिष्ठता देने का आदेश उनके हितों पर प्रतिकूल असर डालेगा और वे वरिष्ठता क्रम में 42 स्थान नीचे चले जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल आशंका और प्रत्याशा के आधार पर इस स्तर पर एसएलपी स्वीकार नहीं की जा सकती।
मध्य प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 50 प्रतिशत पद तहसीलदार तथा सर्वेयर-भू-अधीक्षक अधिकारियों की पदोन्नति से भरे जाते हैं। 2016 में डीपीसी गठित होने के बावजूद 42 पद रिक्त रह गए थे। हाई कोर्ट ने अगस्त 2023 में पदोन्नति रोकने को असंवैधानिक ठहराते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
