पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में बेड में करंट आने, ऑपरेशन के खुले टांकों पर समय पर ध्यान न देने और अव्यवस्थाओं से मरीजों की सुरक्षा खतरे में है।

HighLights
- पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड में अव्यवस्थाओं से मरीजों की सुरक्षा खतरे में
- बंद एसी, टूटी खिड़कियां और परिजन घर से कूलर लाने को मजबूर
- बेड में करंट आने, ऑपरेशन के खुले टांकों पर समय पर ध्यान न देने का आरोप
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। एक छोटे और संकरे कमरे के भीतर छह-छह बेड ठूंसकर लगे हैं। एसी दीवार पर दिखावे के लिए टंगा है, जो लंबे समय से बंद पड़ा है। बेबस परिजन अपने घरों से छोटे टेबल कूलर लाकर बच्चों को हवा देने की कोशिश करते दिखे।
जर्जर हो चुकी बिल्डिंग की खिड़कियां टूटी पड़ी हैं, पर्दों की जगह गंदी चादरें लटकाकर धूप और धूल रोकने की नाकाम कोशिश की जा रही है। यह आंखों देखा हाल है राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े कमला नेहरू अस्पताल (हमीदिया) के पीडियाट्रिक सर्जरी वार्ड का।
जहां नवजात और मासूम बच्चों की सेहत के साथ लापरवाही बरती जा रही है। यहां वार्ड का माहौल ऐसा है कि मरीज व उनके परिजन किसी अनहोनी के साये में जीने को मजबूर हैं। नवदुनिया टीम ने वार्ड का आंखों देखा हाल जाना तो अस्पताल प्रबंधन के तमाम दावों की पोल खुल गई।
टांके खुले रहे और सोती रही व्यवस्था
वार्ड में भर्ती एक मासूम बच्चे के मां रेखा सिंह ने बताया कि बीते कल रात से बच्चे के ऑपरेशन के टांके खुल गए थे। परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ को जानकारी भी दी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पूरी रात मासूम दर्द से तड़पता रहा। सुबह जब डॉक्टर राउंड पर आए, तब परिजनों उनसे विनती की। तब डॉक्टरों के दखल पर मासूम को दोबारा टांके लगाए गए।
वहीं, अस्पताल में भर्ती दो वर्ष के मासूम की मां प्रेमा बाई ने बताया कि वार्ड में इतनी उमस और गर्मी है कि बच्चे का रो-रोकर बुरा हाल है। एसी बंद पड़ा है और टूटी खिड़की पर गंदी चादर लगाई है ताकि मच्छरों से बचा जस सके। मजबूरी में घर से टेबल कूलर लाए तब जाकर थोड़ी राहत मिली।
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बेड में दौड़ रहा था करंट, नर्स बोलीं- डॉक्टर को क्यों बताया
लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं हुआ। स्वजनों ने बताया कि बीते दिनों वार्ड में लगे बेड में अचानक करंट आने लगा। मासूम बच्ची करंट की चपेट में बाल-बाल बची। स्वजनों ने नर्सों को भी जानकारी दी। आखिरकार जब स्वजनों ने डाक्टर से शिकायत की तब जाकर बिजली के तार दुरस्त किए गए।
संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई नर्सों ने मरीज के स्वजनों से ही बहस शुरू कर दी और कहने लगीं-सर (डॉक्टर) को बताने की क्या जरूरत थी?
पीडियाट्रिक वार्ड में जगह और सुविधाओं की समस्या है। उस पूरी इमारत का रिनोवेशन कराया जाना बेहद जरूरी है। कमला नेहरू अस्पताल के सामने नया सेंट्रल ओपीडी ब्लाक तैयार किया जा रहा है। इसके बनते ही पीडियाट्रिक वार्ड को वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा। वर्तमान में वार्ड में जो भी अव्यवस्थाएं या परेशानियां हैं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने के लिए मैं वार्ड प्रभारी से बात करूंगी। -डॉ. कविता एन. सिंह, डीन, गांधी मेडिकल कॉलेज।
कमला नेहरू अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में आ रही समस्याओं और अव्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी मिली है। मरीजों की सुरक्षा और देखभाल में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जल्द से जल्द व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।-डॉ. विजय वर्मा, सह अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल।
