अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभ्यावेदन मिलने के 90 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

HighLights
- विभागीय जांच पर उठे सवाल
- पूर्व फैसले का दिया हवाला
- रिट याचिका का निराकरण
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने सिवनी जिले की सेवा सहकारी समिति समनापुर के पूर्व प्रबंधक रमेश कुमार शरणागत की याचिका का निराकरण करते हुए उन्हें 15 दिन के भीतर नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अभ्यावेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर नियमानुसार निर्णय लें।
विभागीय जांच नहीं होने पर उठाया सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुघोष भामोरे और निशांत मिश्रा ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि केवल आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के आधार पर बिना विभागीय जांच किए सेवा समाप्त कर दी गई, जबकि सहकारी समिति के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
पूर्व फैसले के आधार पर होगा विचार
याचिकाकर्ता ने संजय चौहान बनाम मध्य प्रदेश शासन के पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए विभागीय जांच को अनिवार्य बताया। हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना निर्देश दिया कि यदि पूर्व निर्णय की प्रति के साथ नया अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी उस पर विधि के अनुसार विचार कर निर्णय लें। इसके साथ ही रिट याचिका का निराकरण कर दिया गया।
