नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने भोपाल-देवास फोरलेन पर फास्टैग के जरिए तीन एक्सल बसों से अधिक टोल वसूली को अवैध ठहराया।
प्रभावित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को लौटा
कहा कि टोल कंपनी को करीब 11 करोड़ रुपये प्रभावित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को लौटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने मेसर्स देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना होगा
बोले-एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के 21 मई, 2025 के आदेश को बरकरार रखा। कंपनी पर 25 हजार रुपये की लागत भी लगाई गई, जिसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना होगा।
… इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती
कंपनी का तर्क था कि फास्टैग सिस्टम में तीन एक्सल बसों को तकनीकी रूप से मल्टी एक्सल वाहन की श्रेणी में दर्ज किए जाने के कारण अधिक टोल स्वतः कटता रहा, इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती।
फास्टैग केवल भुगतान का माध्यम है
हाई कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि फास्टैग केवल भुगतान का माध्यम है, टोल की दर या वाहन की श्रेणी तय करने का अधिकार उसे नहीं है। टोल हमेशा रियायत (कंसेशन) समझौते और सरकारी अधिसूचना के अनुसार ही वसूला जाएगा।
इसकी जिम्मेदारी टोल संचालक की होगी
खंडपीठ ने 30 जून, 2007 के रियायत समझौते का हवाला देते हुए कहा कि उसमें बस और मल्टी एक्सल ट्रक की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित हैं। यदि साफ्टवेयर की गलत मैपिंग के कारण अधिक टोल वसूला गया तो इसकी जिम्मेदारी टोल संचालक की होगी।
