नईदुनिया प्रतिनिधि जबलपुर। कटनी जिले में निर्मित देश की सबसे लंबी 11.952 किमी जल सुरंग स्लीमनाबाद टनल अब अंतिम चरण में है।
देश की सबसे लंबी जल सुरंग स्लीमनाबाद टनल
मुख्यमंत्री ड़ॉ मोहन यादव ने शुक्रवार को टनल का निरीक्षण किया। स्लीमनाबाद के सलैया फाटक स्थित निर्माण स्थल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन नदी का गंगा बेसिन का इलाका है, हमारा मालवा का पार्वती काली सिंध चंबल वाला।
खंभात की खाड़ी में गिरती लेकिन …
नर्मदा तो सीधे खंभात की खाड़ी में गिरती लेकिन यह वाकई ये विज्ञान का नया चमत्कार हुआ कि नर्मदा अब सोन नदी के आंचल को भी हरा भरा करेंगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहूंगा
यहां के किसानों को यहां के व्यापारियों को या के उद्योगपतियों को क्षेत्र के लिए एक नया वरदान मिलने वाला और इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहूंगा।
1600 करोड़ की राशि में 275 करोड़ की राशि दी
केंद्र सरकार ने लगभग 1600 करोड़ की राशि में 275 करोड़ की राशि दी। बाकी राज्य ने वहन की। अक्टूबर माह तक टनल से होकर पानी पहुंचाने को लेकर रूपरेखा भी तैयार जाएगी।
पांच जिलों तो पहुंचेगा बरगी नहर से पानी
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने पर जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। नर्मदा का जल गुरुत्वाकर्षण से विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा
दुनिया भर के लोग केस स्टडी करने आएंगे
स्लीमनाबाद टनल को चुनौती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निश्चित रूप से यह इतना अदभुत चुनौतियां वाला स्थान हे कि पूरे देश को क्या दुनिया के लोग इसकी केस स्टडी करने आएंगे। क्योंकि चट्टानें काटने के लिए मशीन तो बनाई जा सकती लेकिन एक मशीन कितनी चुनौतियों के बीच अपना काम कर रही है।
कई प्रकार की चुनौतियों के बावजूद भी टनल का निर्माण जारी
कठोर चट्टान के बाद अचानक मिट्टी की नरम खदान या मोरम की कोई खान आ जाना। मिट्टी के बजाय पानी का जाना, एक लंबा ब्लैक होल टाइप जगह मिल जाना कई प्रकार की चुनौतियों के बावजूद भी टनल का निर्माण जारी रहा है।
भूकंप से प्रभावित नहीं होगी
उन्होंने कहा कि खास बात किसी प्रकार के भूकंप में आने के बावजूद भी यह किसी भूकंप से प्रभावित नहीं होगी अंदर का निर्माण भी 100 साल तक भी यथावत रहेगा ऐसा कंक्रीट का निर्माण बनाया गया सभी प्रकार के सुरक्षा के मानकों का ध्यान रखा गया हैं।
चंद्रदेव पांडे सेफ्टी मैनेजर ने बताया कि टनल बनाने में सबसे बड़ी चुनौती पानी की रही। टनल से पानी की धार फूट रही। जिसे बाहर निकालने के लिए 48 से ज्यादा मोटर पंप लगे है एक पंप 100 से 150 हॉर्स पावर का हैं।
खास बात
- 17 वर्षों की कठिन भू-गर्भीय चुनौती के बाद अंतिम चरण में पहुंची 11.952 किमी लंबी सुरंग
- नर्मदा का जल गुरुत्वाकर्षण से विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा
- 6 जिलों के 1450 गांवों होंगे लाभान्वित
- 2.45 लाख हैक्टेयर भूमि में स्थायी रूप से सिंचाई हो सकेगी।
- 104 से 116 किमी तक स्लीमनाबाद साइड में है
- 154 किमी से ब्रांच विजयराघवद
- नागौद और रीवा तक जाएगी
यह भी पढ़ें- बीटेक छात्रा की मौत : हाई कोर्ट ने जांच पर उठाए गंभीर सवाल, एसपी को विभागीय जांच के निर्देश
