मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कैग की रिपोर्ट को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

HighLights
- इंदौर के अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी की जनहित याचिका
- हाई कोर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य से मांगा जवाब
- 435 स्कूल ऐसे भी हैं जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर कैग की रिपोर्ट ने ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब अब सरकार को हाई कोर्ट में देना होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट के आधार पर दायर इंदौर के अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी की जनहित याचिका को बेहद गम्भीरता से लिया है।
इस सिलसिले में राज्य शासन सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। दरअसल, इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि 7,165 करोड़ रुपये से अधिक के बजट के बावजूद प्रदेश के 1,895 सरकारी स्कूल बिना एक भी शिक्षक के चल रहे हैं, जबकि दूसरी ओर बिना विद्यार्थियों वाले स्कूलों में शिक्षक पदस्थ हैं। कोर्ट ने मामले को जनहित और बच्चों के शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
435 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी विद्यार्थी नहीं
इस जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच 66,814 सरकारी स्कूलों के ऑडिट में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है। इसके विपरीत 435 स्कूल ऐसे मिले, जहां एक भी छात्र नहीं है, लेकिन शिक्षक तैनात हैं। इतना ही नहीं, 85 स्कूलों में स्वीकृत पद नहीं होने के बावजूद 128 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।
अव्यवस्था से रिजल्ट पर भी पड़ा असर
ज्ञान्तवयाचिका में यह भी कहा गया है कि शिक्षक प्रशिक्षण के लिए 7,165.09 करोड़ रुपये का प्रविधान होने के बावजूद पांच वर्षों में सिर्फ 35.71 करोड़ रुपये खर्च किए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में 28.32 प्रतिशत शिक्षक पद रिक्त हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 3.46 प्रतिशत है।
शिक्षा व्यवस्था की यह अव्यवस्था परीक्षा परिणामों में भी दिखाई दी और हाई स्कूल का उत्तीर्ण प्रतिशत 67.74 से घटकर 38.53 प्रतिशत रह गया। हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर शिक्षक नियुक्तियों, बजट के उपयोग, कैग रिपोर्ट में दर्ज अनियमितताओं और शिक्षा के अधिकार पर उठाए गए सवालों का जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
