जबलपुर के सौ वर्षीय यहूदी आरामगाह संरक्षण का मामला अंतरराष्ट्रीय बन गया। इजरायल में भारतीय मूल के यहूदियों ने विरासत बचाने के लिए हस्तक्षेप और संयुक्त…और पढ़ें

HighLights
- रानीताल यहूदी आरामगाह मामला इजरायल तक पहुंचा।
- भारतीय मूल के यहूदियों ने वैश्विक अभियान शुरू किया।
- विरासत संरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थन मि
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर के हृदयस्थल रानीताल स्थित सौ वर्ष पुराने यहूदी आरामगाह को लेकर उठी आवाज अब हजारों किलोमीटर दूर इजरायल में गूंज रही है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन यह मामला अब केवल एक ऐतिहासिक कब्रिस्तान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक स्मृतियों के संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनता जा रहा है।
इजराइल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान छेड़ते हुए अपनी सरकार, विदेश मंत्रालय और भारत-इजराइल के राजनयिक मिशनों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। जबलपुर के यहूदी समुदाय से जुड़े डेनियल अब्राहम ने फेसबुक के माध्यम से दुनिया भर में बसे भारतीय मूल के यहूदियों से इस मुहिम में साथ आने की अपील की है।
पूर्वजों की विरासत बचाने की अपील
- उन्होंने ब्रिगेडियर डेविड अब्राहम कोलटकर सहित इस कब्रिस्तान में दफन अनेक पूर्वजों की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह स्थान केवल अंतिम विश्रामस्थल नहीं, बल्कि भारत में यहूदी समुदाय के इतिहास का जीवंत साक्ष्य है।
- उनके संदेश के बाद अनेक लोगों ने समर्थन व्यक्त करते हुए विरासत संरक्षण की मांग दोहराई है। इसी क्रम में दिवाकर और खीमकर परिवारों के प्रतिनिधियों तथा इजराइल स्थित भारतीय मूल के यहूदी समुदाय के नेताओं ने विदेश मंत्री, मुख्य रब्बी, विदेश मंत्रालय तथा दोनों देशों के राजनयिक मिशनों को पत्र भेजा है।
संयुक्त जांच और संरक्षण की मांग
- पत्र में कब्रिस्तान में कथित तोड़फोड़, अतिक्रमण और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त जांच, दोषियों की पहचान और ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण की मांग की गई है। समुदाय ने इसे केवल संपत्ति का विवाद नहीं, बल्कि पूर्वजों की स्मृति और ऐतिहासिक धरोहर के सम्मान का विषय बताया है।
- यहूदी समुदाय की ओर से हाई कोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि याचिका का उद्देश्य कब्रिस्तान को अतिक्रमण से मुक्त कराना, सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा कथित तोड़फोड़ की निष्पक्ष जांच कराना है। उनका कहना है कि न्यायालय के समक्ष विरासत संरक्षण का प्रश्न प्रमुखता से रखा गया है और समुदाय को सकारात्मक न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद है।
फेसबुक बना वैश्विक जनसमर्थन का मंच
जबलपुर से शुरू हुई यह मुहिम अब इंटरनेट मीडिया के जरिए विश्वभर के भारतीय मूल के यहूदियों तक पहुंच रही है। वीडियो, तस्वीरों और भावनात्मक अपीलों के माध्यम से समुदाय अपने पूर्वजों की स्मृतियों से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को बचाने के लिए जनसमर्थन जुटा रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि यह विवाद अब स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक भारतीय-यहूदी समुदाय की साझा चिंता बन चुका है।
इतिहास, न्याय और विरासत संरक्षण का सवाल
बहरहाल, रानीताल की शांत धरती पर स्थित यह यहूदी आरामगाह आज इतिहास, न्याय और विरासत संरक्षण के त्रिकोण पर खड़ा है। हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है, जबकि इजराइल में जनमत तैयार हो रहा है। आने वाले दिनों में यह प्रकरण केवल एक ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा का नहीं, बल्कि भारत की बहुलतावादी विरासत के संरक्षण की प्रतिबद्धता का भी महत्वपूर्ण पैमाना बन सकता है।
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