निजी स्कूल पर चार वर्षीय छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार और नामांकन समाप्त करने का आरोप लगा है। शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठ…और पढ़ें

HighLights
- अभिभावक ने निजी स्कूल पर गंभीर आरोप लगाए।
- छात्रा का नामांकन समाप्त करने की शिकायत दर्ज हुई।
- जातिगत भेदभाव का आरोप भी शिकायत में लगाया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर के एक निजी स्कूल के खिलाफ एक अभिभावक द्वारा गंभीर शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन ने कथित तौर पर एक चार वर्षीय छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार किया और बाद में उसका नामांकन समाप्त कर दिया।
अभिभावक ने इस कार्रवाई को जातिगत भेदभाव से प्रेरित बताया है। पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र वार्ड निवासी महिला ने कलेक्टर को दिए आवेदन में कहा है कि बच्ची का एडमीशन मयूर कला मंदिर के पास स्थित फोर सिस्टर स्कूल में कराया था। बेटी एलकेजी कक्षा में अध्ययनरत थी।
स्कूल ने आगे पढ़ाने से किया मना
महिला का आरोप है कि स्कूल में बच्ची के साथ लगातार गलत व्यवहार किया गया। उनका कहना है कि एक दिन बच्ची को स्कूल से वापस ले जाने के लिए फोन कर बुलाया गया और यह कहा गया कि स्कूल उसे आगे नहीं पढ़ा सकेगा।
बैठक के बाद बदल गया स्कूल प्रबंधन का व्यवहार
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ समय पहले स्कूल में आयोजित बैठक के दौरान अतिरिक्त गतिविधियों के लिए शुल्क की चर्चा हुई थी। इसी दौरान परिवार की सामाजिक पृष्ठभूमि की जानकारी लेने के बाद स्कूल प्रबंधन का व्यवहार बदल गया। महिला का दावा है कि इसके बाद बच्ची के प्रति स्कूल का रवैया पहले जैसा नहीं रहा।
तीन सदस्यीय जांच समिति का किया गया गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा केंद्र ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। विभाग द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें डाइट के व्याख्याता केशव दुबे, बीएसी नगर-1 रश्मि कौशिक तथा सीएसी नगर-2 राखी बंसल को शामिल किया गया है। जांच समिति को शिकायत के सभी बिंदुओं की पड़ताल कर तथ्यात्मक प्रतिवेदन निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी पक्षों के बयान लिए जाएंगे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। फिलहाल जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
