20 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में दर्ज मारपीट के प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए दोषमुक्ति के निर्णय को सही ठहरा…और पढ़ें

HighLights
- 20 हजार के लेन-देन विवाद में कोर्ट का बड़ा फैसला
- लेन-देन विवाद में मारपीट के आरोप से चारों आरोपी बरी
- सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। 20 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में दर्ज मारपीट के प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाए गए दोषमुक्ति के निर्णय को सही ठहराते हुए अपील निरस्त कर दी। अपर सत्र न्यायाधीश केके मिश्रा ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में असफल रहा है, इसलिए बरी किए गए आरोपितों के विरुद्ध हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
प्रकरण में आरोपितों की ओर से अधिवक्ता अशोक जायसवाल ने पैरवी करते हुए तर्क दिया कि घटना के संबंध में प्रस्तुत साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास हैं तथा अभियोजन की कहानी विश्वसनीय नहीं है। न्यायालय ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद इस तर्क से सहमति व्यक्त की।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता के बयान, एफआईआर और अन्य साक्ष्यों में महत्वपूर्ण विसंगतियां हैं। स्वतंत्र गवाहों ने भी अभियोजन का अपेक्षित समर्थन नहीं किया। मेडिकल एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके।
निर्णय में कहा गया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस व संदेह से परे प्रमाणों के आधार पर ही संभव है। ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों का किया गया मूल्यांकन विधिसम्मत और तार्किक है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। परिणामस्वरूप अपील निरस्त करते हुए 31 दिसंबर, 2022 का दोषमुक्ति आदेश यथावत रखा गया।
