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HighLights
- कार्तिकेय चौहान की सहमति के बाद कोर्ट का निर्णय।
- ट्रायल कोर्ट का मामला भी समाप्त करने के निर्देश दिए।
- लिखित खेद स्वीकार कर हाई कोर्ट ने बंद की कार्यवाही।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को वर्ष 2018 के चर्चित मानहानि प्रकरण में बड़ी राहत मिल गई। कोर्ट ने राहुल गांधी द्वारा व्यक्त लिखित खेद (रिग्रेट) को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ लंबित कार्यवाही समाप्त कर दी। साथ ही भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में लंबित मानहानि प्रकरण को भी बंद करने का आदेश दिया।
दरअसल, यह आठ साल पुराना मामला राहुल गांधी के उस चुनावी भाषण से जुड़ा था, जिसमें पनामा पेपर्स विवाद का उल्लेख करते हुए कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम आ गया था। हाई कोर्ट में दायर आवेदन में राहुल गांधी ने कहा कि 29 अक्टूबर, 2018 को झाबुआ में दिए गए भाषण में नाम का उल्लेख त्रुटिवश हो गया था।
अगले ही दिन उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दिया था कि उनका आशय छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री के पुत्र से था, न कि कार्तिकेय चौहान अथवा उनके पिता शिवराज सिंह चौहान से। आवेदन में उन्होंने उक्त कथन पर खेद भी व्यक्त किया।
आखिर क्या था कार्तिकेय व राहुल गांधी के बीच मानहानि विवाद का मामला, ऐसे हुआ विवाद समाप्त
कार्तिकेय चौहान की ओर से दायर जवाब में कहा गया कि राहुल गांधी द्वारा खेद व्यक्त किए जाने और स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद वे विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
दोनों पक्षों की सहमति को रिकार्ड पर लेते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आगे कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही राहुल गांधी की याचिका का निराकरण कर दिया गया।
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण तन्खा और अजय गुप्ता ने पक्ष रखा, जबकि कार्तिकेय चौहान की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर उपस्थित हुए।
