प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचकर करीब एक करोड़ 83 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया…और पढ़ें

HighLights
- ईओडब्ल्यू (EOW) की जांच के बीच गेहूं खरीदी का भुगतान होने पर उठे सवाल
- 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं बेचकर 1.83 करोड़ का फर्जीवाड़ा
- किसानों की जानकारी के बिना दस्तावेजों का उपयोग कर गेहूं का फर्जी पंजीयन
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिंड। जिले में समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीदी के नाम पर करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं समर्थन मूल्य पर बेचकर करीब एक करोड़ 83 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त कर लिया गया। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है और संबंधित किसानों सहित पूरे प्रकरण की जानकारी जुटाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में अनियमितताओं की जांच पहले से ही आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) द्वारा की जा रही थी। इसके बावजूद जांच पूरी होने से पहले ही संबंधित किसानों के खातों में भुगतान कर दिया गया। अब प्रशासन इस बात की पड़ताल कर रहा है कि भुगतान किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका रही।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन किसानों की जमीनों को गेहूं विक्रय के लिए पंजीकृत दिखाया गया, उनमें से कई किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि उनकी जानकारी के बिना ही दस्तावेजों का उपयोग कर पंजीयन किया गया।
बढ़ी तारीख में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
बताया गया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों को 10 मार्च तक पंजीयन कराना था। पहले अंतिम तिथि 5 मार्च निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 10 मार्च कर दिया गया था। जानकारी के अनुसार इसी बढ़ी हुई अवधि में, विशेषकर अंतिम दिनों में देर रात तक बड़ी संख्या में संदिग्ध पंजीयन किए गए, जिनके माध्यम से फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
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गौरतलब है कि उस समय बाजार में गेहूं का भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच था, जबकि सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 2625 रुपये प्रति क्विंटल था। इस प्रकार प्रति क्विंटल 400 से 625 रुपये तक का अतिरिक्त लाभ मिलने के कारण फर्जी तरीके से गेहूं बेचने की आशंका और मजबूत हो गई है।
जिन 23 किसानों के खातों में भुगतान किया गया उनकी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी किसानों के साथ-साथ इस पूरे मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सुनील कुमार बोहिद, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी।
