राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार व रिश्तेदारों से जुड़े जमीन खरीद के आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए थे। इसके जवाब में भाजपा ने बुधवार को तीखा पलटवार किया। सरकार के कई मंत्री मुख्यमंत्री के समर्थन में सामने आए और कांग्रेस पर बेबुनियाद व्यक्तिगत आरोप लगाकर छवि खराब करने का आरोप लगाया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि लगातार चुनावी हार से परेशान कांग्रेस राजनीतिक दिवालियापन के दौर से गुजर रही है। पार्टी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य नहीं है। साथ ही कहा गया कि पूरे मामले को भाजपा का लीगल सेल देख रहा है और जरूरत पड़ने पर मानहानि का नोटिस भी दिया जाएगा।
वीर भारत न्यास पर भाजपा ने दी सफाई
कांग्रेस द्वारा उज्जैन में वीर भारत न्यास को एक रुपये में भूमि देने के आरोप पर भाजपा ने सफाई दी। मंत्रियों ने कहा कि वीर भारत न्यास कोई निजी संस्था नहीं है, बल्कि यह सरकार के संस्कृति विभाग का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भूमि का हस्तांतरण राजस्व विभाग से संस्कृति विभाग को किया गया था।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि भूमि का स्वामित्व बनाए रखने के लिए एक रुपये की राशि ली गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इसमें घोटाला कहां से हो गया। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी और निजी ट्रस्ट के बीच अंतर समझना चाहिए।
राकेश सिंह ने कांग्रेस को दी चुनौती
राकेश सिंह ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अपनी नाकामियों के कारण हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी संपत्ति का पूरा विवरण दिया था।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि संपत्ति में कोई गलत वृद्धि हुई है तो तथ्य सामने रखें। राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री पर लगाए गए आरोप निराधार, तथ्यहीन और भ्रम फैलाने वाले हैं।
उन्होंने राबर्ट वाड्रा से जुड़े भूमि विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब ऐसे मामलों में सवाल उठते हैं तो कांग्रेस नेता इसे व्यक्तिगत मामला बताते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों की संपत्ति को उनसे जोड़ना गलत है।
मंत्रियों ने कांग्रेस पर साधा निशाना
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता है। उनके कार्यों को मुख्यमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है।
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार कश्यप ने कहा कि डॉ. मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही मास्टर प्लान की अधिसूचना वर्ष 2023 में जारी हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में बाद में कोई बदलाव नहीं किया गया। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है और पिछड़ा वर्ग से आने वाले मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी हाईवे या विकास परियोजना को प्रभावित नहीं किया गया। कृष्णा गौर ने कहा कि कांग्रेस की ओर से ओबीसी वर्ग के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को निशाना बनाना एक सुनियोजित षड्यंत्र है।
