जबलपुर नरसिंहपुर, कटनी, सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला और डिंडौरी जिलों से किसानों के बीच शिकायत बुलंद …और पढ़ें

HighLights
- जमीनी स्तर पर तस्वीर पूरी तरह संतोषजनक नहीं दिख रही
- लगभग दो लाख टन उर्वरक वितरित किया जा चुका है
- प्रदेश सरकार का दावा, नई ई-टोकन व्यवस्था से वितरण पारदर्शी
सुरेन्द्र दुबे, नईदुनिया , जबलपुर। खरीफ सीजन की दस्तक के साथ जबलपुर संभाग सहित समूचे महाकोशल रीजन के किसान खाद की व्यवस्था में जुट गए हैं। प्रदेश सरकार का दावा है कि उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और नई ई-टोकन व्यवस्था से वितरण पारदर्शी हुआ है।
11.66 लाख से अधिक ई-टोकन जारी हो चुके अब तक
सरकार के अनुसार अप्रैल, 2026 से लागू ई-विकास प्रणाली के माध्यम से प्रदेश में अब तक 11.66 लाख से अधिक ई-टोकन जारी किए जा चुके हैं तथा लगभग दो लाख टन उर्वरक वितरित किया जा चुका है। सोमवार को समर वेकेशन समाप्त होते ही हाई कोर्ट परिसर में टकराए किसानों ने अपना दर्द साझा किया।
टोकन जनरेट होने के बावजूद खाद उपलब्ध नहीं
जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, सिवनी, छिंदवाड़ा, मंडला और डिंडौरी जिलों से किसानों के बीच यह शिकायत सुनाई देने लगी है कि टोकन जनरेट होने के बावजूद कई केंद्रों पर समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि पोर्टल पर स्लाट मिलने के बाद भी वितरण केंद्रों से वापस लौटना पड़ रहा है।
दावा है कि कतारें खत्म, कालाबाजारी पर अंकुश लगा है
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश सरकार ई-टोकन प्रणाली को खाद वितरण में गेम चेंजर के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दावा है कि इससे कतारें खत्म हुई हैं, कालाबाजारी पर अंकुश लगा है और खाद का आवंटन किसान की भूमि तथा फसल पैटर्न के अनुसार हो रहा है।
टोकन प्राप्त किसानों को खाद मिलने में विलंब क्यों हो रहा है
सवाल उठता है कि यदि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और टोकन प्रणाली सफलतापूर्वक चल रही है, तो फिर टोकन प्राप्त किसानों को खाद मिलने में विलंब क्यों हो रहा है?
शासन और प्रशासन जवाब दें :
- जबलपुर संभाग के सातों जिलों में डीएपी, यूरिया और एनपीके का वर्तमान स्टाक कितना है?
- कितने किसानों के टोकन जनरेट हुए और कितनों को वास्तविक वितरण हुआ?
- क्या समस्या पोर्टल, परिवहन, गोदाम या वितरण केंद्र स्तर पर है?
- क्या किसानों को निर्धारित तिथि पर खाद मिल रही है या पुनः चक्कर लगाने पड़ रहे हैं?
सरकार के आंकड़ों में पर्याप्त खाद
किसानों के अनुभव में इंतजार : खरीफ से पहले ई-टोकन व्यवस्था की पहली बड़ी परीक्षा। यह स्थिति प्रशासन के दावों और खेत स्तर की वास्तविकता के बीच के अंतर को केंद्र में लाती है। यह महज खाद संकट नहीं, बल्कि व्यवस्था की प्रभावशीलता की पड़ताल की आवश्यकता रेखांकित कर रही है।
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