शैलेंद्र लड्ढा, नईदुनिया न्यूज, सुसारी (धार)। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां प्रदेश के कई हिस्सों में जलसंकट की स्थिति बनी हुई है, वहीं नर्मदा नदी के अंतिम छोर के चार जिलों में इस वर्ष दशकों बाद सुखद हालात दिखाई दे रहे हैं।
नर्मदा नदी का जलस्तर वर्तमान में 127.42 मीटर दर्ज किया गया है, जो गुजरात स्थित सरदार सरोवर बांध पर वर्ष 2017 में गेट लगने के बाद जून में अब तक का सर्वाधिक स्तर माना जा रहा है। जलस्तर ऊंचा रहने से न केवल पेयजल योजनाओं को राहत मिली है, बल्कि नर्मदा तटों पर भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है।
प्रदेश के चार जिले धार, बड़वानी, आलीराजपुर और खरगोन जिले में नर्मदा नदी के 180 किमी के दोनों तटों पर इस बार नर्मदा में जलस्तर बनाए रखने का प्रमुख कारण गुजरात में सरदार सरोवर बांध से नहरों में अपेक्षाकृत कम पानी छोड़ा जाना है। गुजरात के अनेक औद्योगिक क्षेत्रों को नहरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और गैस आपूर्ति में कमी के कारण कई औद्योगिक एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां अपनी क्षमता के केवल 40 से 50 प्रतिशत तक ही संचालित हो रही हैं। इससे पानी की मांग में कमी आई और बांध से जल निकासी भी सीमित रही।
ऊपरी बांधों में भरपूर जल संग्रह
नर्मदा के ऊपरी क्षेत्र स्थित बरगी, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांधों में भी पर्याप्त जल संग्रह बना हुआ है। पिछले मानसून में हुई अच्छी वर्षा तथा जनवरी माह तक कैचमेंट क्षेत्र में हुई वर्षा ने जल भंडारण को मजबूत बनाए रखा। साथ ही इन बांधों से लगातार बिजली उत्पादन होने के कारण नियंत्रित रूप से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे नर्मदा नदी में जल प्रवाह बना हुआ है और जलस्तर संतुलित बना हुआ है।
पेयजल योजनाओं को मिली बड़ी राहत
गत वर्ष की तुलना में इस बार नर्मदा का जलस्तर लगभग छह मीटर अधिक बना हुआ है। इसका सीधा लाभ नर्मदा किनारे संचालित 30 से अधिक पेयजल योजनाओं को मिल रहा है। धार, बड़वानी, खरगोन और नर्मदापुरम क्षेत्र के अनेक गांवों और कस्बों में पेयजल आपूर्ति सुचारू बनी हुई है। गर्मी के चरम दौर में भी जलसंकट की स्थिति नहीं बनने से स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने राहत महसूस की है।
तीर्थ घाटों पर बढ़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही
नर्मदा में पर्याप्त जल उपलब्ध होने से कोटेश्वर, बोधवाड़ा और राजघाट जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी रौनक बनी हुई है। सामान्यतः जून में कई घाटों पर पानी पीछे हट जाता है, लेकिन इस वर्ष घाटों तक पानी मौजूद है। इसके चलते प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक स्नान तथा दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद गर्मी के मौसम में नर्मदा का ऐसा स्वरूप देखने को मिल रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में जल समृद्धि का माहौल नजर आ रहा है।
गत 10 वर्ष में 13 जून को नर्मदा का जलस्तर राजघाट पर (मीटर में)
वर्ष… जलस्तर
- 2017… 114.40
- 2018… 114.50
- 2019… 119.90
- 2020… 122.10
- 2021… 122.80
- 2022… 116.80
- 2023… 117.10
- 2024… 123.10
- 2025… 121.60
- 2026… 127.42
