याचिकाकर्ताओं की ओर से अनुभव के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत अंकों के प्रविधान, आरक्षण संबंधी लाभों से वंचित किए जाने तथा समान अवसर के सिद्धांत के उल्लंघन …और पढ़ें

HighLights
- सुरक्षित रखे जाएंगे याचिकाकर्ताओं के नतीजे।
- हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन ही रहेंगे।
- 2024 के भर्ती विज्ञापनों को चुनौती दी गई है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा व न्यायमूर्ति जयकुमार पिल्लई की युगलपीठ ने असिस्टेंट प्रोफेसर, कंप्यूटर विज्ञान भर्ती परीक्षा-2024 के परिणाम घोषित करने के संबंध में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपी-पीएससी) को सशर्त अनुमति प्रदान कर दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के परिणाम सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखे जाएंगे और अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे। हाई कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश 21 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाओं में छतरपुर निवासी अतिथि विद्वान हरचंडी अहिरवार सहित अन्य अभ्यर्थियों ने उच्च शिक्षा विभाग व एमपी-पीएससी द्वारा दिसंबर 2024 में जारी भर्ती विज्ञापनों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अनुभव के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत अंकों के प्रविधान, आरक्षण संबंधी लाभों से वंचित किए जाने तथा समान अवसर के सिद्धांत के उल्लंघन की आपत्ति उठाई गई है।
उल्लेखनीय है कि 17 मार्च, 2026 को हाई कोर्ट ने लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके याचिकाकर्ताओं को साक्षात्कार में शामिल होने की अनुमति दी थी, लेकिन उनके परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद एमपी-पीएससी ने आवेदन प्रस्तुत कर कहा कि परिणाम जारी नहीं होने से चयन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और भर्ती आगे नहीं बढ़ पा रही है।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन और आयोग की ओर से तर्क सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आयोग को गैर-याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों के परिणाम घोषित करने की अनुमति दे दी।
वहीं, याचिकाकर्ताओं के परिणाम सीलबंद लिफाफे में रखने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी। अनुभव अंकों और आरक्षण से जुड़े विवादों पर हाई कोर्ट का अंतिम फैसला भर्ती प्रक्रिया की दिशा तय करेगा।
